my new test post for view

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दोस्तों, जमाना हमेशा बदलता रहता है। पहले DSLR कैमरा का ज़माना था लेकिन अब धीरे धीरे मिर्रोरलेस भी इम्पोर्टेन्ट बनता जा रहा है। कुछ लोग अभी भी DSLR कैमरा को इस्तेमाल कर रहे है और कुछ लोग मिर्रोरलेस कैमरा को ज्यादा इम्पोर्टेंस दे रहे है। तो क्या DSLR कैमरा सही है या मिर्रोरलेस कैमरा ?


आपके लिए कौन सा कैमरा बेस्ट रहेगा ? और कोण सा कैमरा आपके लिए बेकार होने वाला है ? सारी बातें मैं आपको इस पोस्ट में बताऊंगा। तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।


दोस्तों, सबसे पहले तो मैं आपको ये बता दूँ कि अब मिर्रोरलेस कैमरा ही सबसे पास आने वाला है। DSLR कैमरा अब सिर्फ नाम के रह गए है। लेकिन फिर भी DSLR कैमरा के अलग फीचर्स है और मिर्रोरलेस कैमरा के अलग फीचर्स है।


DSLR vs मिर्रोरलेस के इस कम्पटीशन में आपको सब कुछ पता चलने वाला है। सबसे पहले हम DSLR कैमरा को समझेंगे फिर हम मिर्रोरलेस कैमरा को समझेंगे और फिर हम दोनों को कम्पेयर करके जानेंगे की अच्छा कोण सा है। तो चलिए एक एक करके सब कुछ समझते है।









व्हाट इस DSLR कैमरा ?


DSLR का फुल फॉर्म Digital Single Lens Reflact होता है। इसमें एक Pentaprizm नाम का मिरर होता है जिससे लाइट रिफ्लेक्ट होकर viewfinder तक आती है। DSLR कैमरा में सेंसर के सामने एक शटर होता है और उसके सामने एक मिरर होता है।


सबसे पहले लाइट लेंस से होते हुए मिरर पर आती है। जब हम कोई पिक्चर क्लिक कर रहे होते है तो ये मिरर ऊपर की तरफ उठ जाता है। फिर लाइट शटर पे आती है। फिर शटर तेज़ी से खुलता और बंद होता है।


शटर के खुलने से लाइट सेंसर पर आ जाती है और सेंसर उस लाइट को एक पिक्चर में सेव कर देता है। शटर के खुलने और बंद होने की स्पीड को हम लोग शटर स्पीड कहते है।


पिक्चर क्लिक करते समय या वीडियो रिकॉर्ड करते समय DSLR कैमरा का विएवफिन्दर बंद हो जाता है। क्युकि मिरर ऊपर की तरफ उठा जाता है जिससे लाइट पेन्टाप्रिज़्म को मिलने के बजाय सेंसर को मिलने लगता है।



व्हाट इस मिर्रोरलेस कैमरा ?


मिर्रोरलेस कैमरा में पेन्टाप्रिज़्म नाम का शीशा और शटर नहीं होता है। तो लाइट लेंस से होते हुए सीधा सेंसर को मिलता है। और सेंसर लाइट से एक पिक्चर को सेव कर देता है।


और मिर्रोरलेस कैमरा के व्यू फाइंडर कभी भी बंद नहीं होता है। क्युकी इसमें मिरर होता ही नहीं है। और आप वीडियो भी व्यू फाइंडर से भी रिकॉर्ड कर सकते है।




DSRL vs Mirrorless



Body

DSLR कैमरा की बड़ी मजबूत नहीं होती है। लेकिन कैमरा अगर हाथ से छूट कर ज़मीं पर गिरता है तो कैमरा काफी हद तक बचा रहता है।


क्युकि अधिकतर DSLR कैमरा की पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक से बानी होती है। और ये प्लास्टिक हल्का और sock प्रूफ होता है। जो गिरने से सजा नुकसान नहीं देता है।


मिर्रोरलेस कैमरा की मजबूत होती है क्युकि अधिकतर मिर्रोरलेस कैमरा की बॉडी स्टेनलेस स्टील या एल्युमीनियम से बानी होती है। लेकिन अगर आपका मिर्रोरलेस कैमरा हाथ से छूट कर ज़मीं पर गिरता है तो कैमरा को ज्यादा नुक्सान सहना पड़ सकता है।


क्युकी मेटल की बॉडी शॉक प्रूफ नहीं होता है। और मेटल बॉडी का वज़न भी थोड़ा ज्यादा होता है।



Lens support

DSLR कैमरा में आप उसी कंपनी का लेंस लगा सकते है जिस कंपनी का कैमरा है। लेकिन DSLR कैमरा की बॉडी का डिज़ाइन भरी से भरी लेंस को आराम से संभाल सकता है। जैसा की आप नीचे फोटो में देख सकते है।


मिर्रोरलेस कैमरा में आप सही अडाप्टर से साथ किसी भी कंपनी का लेंस इस्तेमाल कर सकते है। लेकिन आप मिर्रोरलेस कैमरा में बड़े और भारी लेंस को नहीं लगा सकते है। क्युकि मिर्रोरलेस कैमरा की बॉडी का डिज़ाइन भारी लेंस को संभाले में मदद नहीं करता है।



फीचर्स

DSLR कैमरा में फिसिकल शटर होने के होने से इसकी स्पीड कम होती है। आप अच्छे से अच्छे DSLR कैमरा में ज्यादा से ज्यादा 15 कॉन्टिनुएस शॉट पर सेकंड ले सकते है।

और DSLR  कैमरा में सेंसर के सामने मिरर और शटर होने से उसके ऑटो फोकस रेंज बहुत कम हो जाती है जिससे आपको 5 से 45 ऑटो फोकस पॉइंट्स ही मिल पाते है।


DSLR कैमरा में फोटो क्लिक करने से शटर के ऊपर नीचे होने से आवाज़ आती है।




मिर्रोरलेस कैमरा में फिज़िकल शटर न होने से ( इलेक्ट्रॉनिक शटर होने से ) इसकी स्पीड काफी बढ़ जाती है। और आप कॉन्टिनुएस शॉट में 30 फोटोज पर सेकंड ले सकते है।


मिर्रोरलेस कैमरा में सेंसर के सामने कुछ न होने से फोकस रेंज बढ़ जाती है जिससे आपको 500 से भी ज्यादा ऑटो फोकस पॉइंट्स मिल जाते है।

मिर्रोरलेस कैमरा में इलेक्ट्रॉनिक शटर होने से उनमे से किसी भी तरह की कोई आवाज़ नहीं आती है। जिससे आप साइलेंट शूटिंग भी कर सकते है



View Finder

DSLR कैमरा में ऑप्टिकल व्यू फाइंडर होता है। ऐसे व्यू फाइंडर कैमरा के बंद होने के बाद भी काम करते रहते है। मतलब की इन्हे कोई पावर की जरुरत नहीं होती है। और इसीलिए DSLR कैमरा की बैटरी भी ज्यादा देर तक चलती है।


DSLR कैमरा का viewfinder से आपको वही दीखता है जो असली में होता है। अगर आप अपने कैमरा में किसी तरह की सेटिंग करते है तो सेटिंग का इफ़ेक्ट आपको viewfinder में नहीं दीखता है। इसके लिए आपको बार बार फोटो क्लिक करके देखना पड़ेगा की सेटिंग से क्या इफ़ेक्ट आया है।



mirrorless कैमरा में इलेक्ट्रॉनिक viewfinder होने से आपको वही दिखेगा जो अपने कैमरा में सेटिंग की हुई है। इलेक्ट्रॉनिक viewfinder ऐसा होता है जैसे की एक एक्स्ट्रा lcd कैमरा के अंडर लगा दिया गया हो। और ज्यादा lcd मतलब जल्दी बैटरी ख़तम।




battery

DSLR कैमरा की बॉडी बड़ी होने से बैटरी भी बड़ी लगाई जाती है। जिससे बैटरी की पावर भी बढ़ जाती है। Viewfinder भी बैटरी के बिना ही काम करता है तो वह से भी बैटरी की बचत होती है।


और साथ ही सेंसर के सामने मिरर होने से सेंसर भी तभी ऑन होता है जब मिरर ऊपर की तरफ उठ जाता है। वर्ण वह भी अधिकतर बंद ही रहता है। तो कुछ मिला के DSLR कैमरा की बैटरी ज्यादा देर तक चलती है।


मिर्रोरलेस कैमरा की बड़ी छोटी होने से उसमे बैटरी भी छोटी ही लगाई जाती है। जिससे उस बैटरी की पावर भी कम हो जाती है।


इलेक्ट्रॉनिक viewfinder भी एक तरह से screen ही होता है तो उसे भी बैटरी की पावर चाहिए होती है। मिर्रोरलेस  कैमरा में जब भी आप कैमरा को ऑन रखेंगे तब तक लाइट सेंसर को मिलता रहता है। और सेंसर हमेशा चालू रहता है जिससे बैटरी भी ज्यादा खर्च होता है।


कुल मिला कर मिर्रोरलेस कैमरा में बैटरी कम समय के लिए ही चलती है।



Maintanence

DSLR कैमरा की बॉडी बहुत ही फ्लेक्सिबल होती है। छोटी मोटी ठोकर से इसका कोई नुकसान नहीं होता है।


DSLR कैमरा में  मिरर और शटर होने से सेंसर धुल मिट्टी से बचा रहता है।


DSLR कैमरा का ग्रिप सही होने से हाथ में एक दम सही फोट होता है। जिससे कैमरा हाथ से छूटने का दर नहीं होता है।


अगर DSLR कैमरा में धुल मिट्टी चली जाये तो आप उसे घर पर साफ़ नहीं कर सकते है।




मिर्रोरलेस कैमरा की बॉडी सॉलिड होती है लेकिन इसे ध्यान से संभाल के रखने की जरूरत होती है।


मिर्रोरलेस कैमरा में सेंसर सामने होने की वजह से धुल मिट्टी सीधा सेंसर पर बैठ जाता है। जिससे बहुत प्रॉब्लम हो जाती है।


मिर्रोरलेस कैमरा की बॉडी छोटी और मेटल का होने की वजह से हाथ में सही से गृप नहीं बना पाता है। जिससे कैमरा हाथ से छूट भी सकता है।


अगर मिर्रोरलेस कैमरा के सेंसर पर धुल चिपक जाये तो आप घर पर ही सावधानी से इसे साफ़ कर सकते है।



concluesion

दोस्तों, अगर आपको सही कैमरा सेलेक्ट करना है तो पहले अपने काम में आने वाले जरूरतों की एक लिस्ट बनाए। फिर उसके हिसाब से अपने कैमरा को सेलेक्ट करें।


जैसे अगर आपको बेहतर गृप के साथ लोग बैटरी लाइफ और प्रोफेशनल दिखावे के लिए बड़े साइज का कैमरा चाहिए तो आपको DSLR कैमरा लेना चाहिए।


और अगर आपको एक छोटा सा कॉम्पैक्ट साइज का कैमरा जिसे आप कही भी आराम से ले जा सके तो आपको मिर्रोरलेस कैमरा लेना चाहिए।


DSLR कैमरा में आपको बैटरी ज्यादा मिल जाती है। बड़े और भरी लेंस को आप बिना किसी परेशानिओ के इस्तेमाल कर सकते है। अगर आप वेडिंग या पार्टीज में जा रहे है तो आपको प्रोफेशनल दिखावे के भी भी बड़े साइज का कैमरा चाहिए होगा।


मिर्रोरलीस कैमरा में आपको साइज छोटा होने से इस कैमरा को कही भी आसानी से ले जा सकते है और शटर न होने से आप इस कैमरा से साइलेंट शूटिंग भी कर सकते है।


अगर आप ऐसी जगह है और आप बताना नहीं चाहते की आप किनकी फोटो ले रहे  पर आप मिर्रोरलेस कैमरा का इस्तेमाल करके साइलेंट शूटिंग कर सकते है। बीएस आपको मिर्रोरलेस कैमरा को जरा ध्यान से संभाल के रखने की जरुरत होगी।


दोनों ही कैमरा वाटरप्रूफ नहीं होता है। और दोनों ही कैमरा में लेंस आप चेंज कर सकते है। बाकि आप अपने काम के हिसाब से किसी एक को सेलेक्ट कर सकते है।


अगर आपको दोनों कैमरा की सही जानकारी इस पोस्ट से मिली है तो कृपया इस पोस्ट को कम से कम एक बार जरूर शेयर करें। और भी ढेर सरे कैमरा और टिप्स ट्रिक की जानकारी के लिए इस वेबसाइट को फॉलो और बुकमार्क जरूर करें। धन्यवाद

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